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Sahitya

मन का विचार

मेरा मन आज अशांत सा क्यों हैं

मेरा जीवन इतना वीरान सा क्यों हैं

मंजीर पर आ के भी तन्हा हूं मैं

आज न जाने फिर भी परेशान सा क्यों हैं

 

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